Hanuman Ji Yog Yogini

🧘 Category: Daan 📅 04/12/14

हनुमान जी के योगी--योगिनी

 

हे श्री कल्कि मण्‍डल के आदिगुरू श्री हनुमान जी महाराज मैं 5 रुपये/20रुपये/129 रुपये (अनुभव के अनुसार) आपकी योगी-योगिनियों को प्रसाद और दक्षिणा के निमित्‍त संकल्‍प करके आपको अर्पण कर रहा/रही हूँ, इसे स्‍वीकार करें। जब क्रूर ग्रहों के प्रभाव, आसुरी शक्तियों के प्रहार, इस जन्‍म और पूर्व जन्‍मों के मेरे संचित पापों के कारण

1)    क) (प्रगट रोगों, परेशानियों का विवरण) जो कष्‍ट दे रहे हैं।

ख) अनुभव में कल्कि जी द्वारा दिखाई जा रहे नौकर का जाना, उनका झगड़ा, गाँव जाना अथवा वापिस नहीं आने की दुविधा दिखे।

ग) जब छिपे हुए असाध्‍य रोग का यदि कोई भी जहर मेरे शरीर में फैलकर मुझे बिस्‍तर पर सुलाना चाहता है, डॉक्‍टर, अस्‍पताल, और ऑपरेशन के चक्‍कर में फंसा कर तबाह और बर्बाद करना चाहता है या कर रहा है, कल्कि जी के कार्य करने से रोकना चाहता है, इस संकल्‍प के द्वारा अपनी योगी-योगिनियों और सम्‍बन्धित आसुरी शक्तियों को उनका भाग देकर तृप्‍त और संतुष्‍ट करें, मुझे आयु और आरोग्‍यता प्रदान करें। स्‍वस्‍थ शरीर से, सुखी, भाव और वैभवता पूर्वक जीते हुए अपने परिवार के सदस्‍यों के साथ मुझे कल्कि जी के प्राकट्य का अति विशिष्‍ट कार्य करना है।

2)    जब घर और व्‍यापार में अव्‍यवस्‍था, रुकावट और अशांति है तो भी अनुमान जी की योगी-योगिनियों का संकल्‍प पूर्ण प्रभावी है।

नोट: यदि अस्‍पताल, ऑपरेशन या किसी बड़ी बीमारी का अनुभव आता है तो 129 रुपये का संकल्‍प निकाला जाता है। प्रसाद में 60 रुपये की बूंदी अथवा बूंदी बेसन के लड्डू, लगाए जाते हैं। 10 रुपये हनुमान जी का प्रसाद चढ़ाते हुए मंदिर में दें बाकी 69 रुपये गरीबों, मंदिरों में बैठे ब्राह्मण, ब्राह्मणियों में प्रसाद के साथ बाँट दें।

अपनी आमदनी, सेल्‍स, तनख्‍वाह, घर खर्च, पॉकेट मनी किराए, ब्‍याज आदि के रुपयों में से (कम से कम 1 अधिकतम प्रतिशत 10 प्रतिशत) शुभ के रुपयों का संकल्‍प हे कल्कि भगवान् मैं संकल्‍प करके आपके शुभ के खजाने में रख रहा/रही हूँ, इसे स्‍वीकार करें। मेरे धन और व्‍यापार समृद्धि में वृद्धि करें, मुझे आगे बढ़ने का मार्ग दें और बरकत दें जिससे मैं आपके शुभ के खजाने में स्‍वत: बढ़ोत्‍तरी हो। मुझे अपने परिवार के साथ स्‍वस्‍थ शरीर से सुख, समृद्धिपूर्वक, वैभवशाली जीवन जीते हुए आपके प्राकट्य का अति विशिष्‍ट कार्य करना है।

हे कल्कि भगवान्, मैं हक् अनीह् की 5 माला के हवन/जाप का संकल्‍प करके आपको अर्पण कर रहा/रही हूँ, इसे  स्‍वीकार करें। कलियुग के नेतृत्‍व में उसकी आसुरी शक्तियाँ प्रहार करके मुझे असाध्‍य रोगों से पीडि़त कर बिस्‍तर पर लिटा देना (सुलाना) चाहती हैं, मृत्‍यु तुल्‍य कष्‍ट देकर नारकीय जीवन जीने को मजबूर करना चाहती हैं (जिस रोग का अनुभव आया या जिससे हम पीडि़त हैं उसका विवरण) आपके शुभ व प्रचार के कार्य करने से रोकना चाहती हैं। इस संकल्‍प के द्वारा मुझे भगवान् धनवंतरी वैद्य एवं दुर्गा जी की योगिनियों की कृपा प्रदान कर रोग से छुटकारा दिलवाऐं। उसके चंगुल में फंसने से रोकें, पूर्ण (पूरी) आयु और आरोग्‍यता प्रदान करें। मुझे स्‍वस्‍थ शरीर से, सुखी भाव से वैभवतापूर्वक आपके प्राकट्य का अति विशिष्‍ट कार्य करना है।

🎬 Latest Video
KNOW ABOUT KALKI
🌼 Daily Nek Soch

Verse from Bhagwat Geeta

Read More
✨ Share Your Anubhav

Your spiritual experiences inspire others on this divine path.

Submit Anubhav
💬