Chitragupt Ji

🧘 Category: Daan 📅 04/12/14

 

 

 

 

 

चित्रगुप्‍त जी

 

हे चित्रगुप्‍त महाराज, मैं यह 20 रुपये आपकी दक्षिणा और प्रसाद के निमित्‍त संकल्‍प करके आपको अर्पण कर रहा हूँ, इसे स्‍वीकार करें। आप सभी प्राणियों के पाप व पुण्‍य का हिसाब रखते हें। पिछले जन्‍मों व मेरे इस जन्‍म के मेरे जो भी संचित पाप हैं, इस संकल्‍प के द्वारा उनका भुगतान करके मेरे खाते से हटाएं। पूर्व जन्‍मों के मेरे जो भी संचित पुण्‍य हैं और जाने-अनजाने मैने भगवान् कल्कि के जो भी अच्‍छे काम किए है, इस जन्‍म के उनके जो भी अच्‍छे कार्य मैं कर रहा हूँ उन पुण्‍यों का फल मुझे प्रदान करें जिससे मुझे सुख और सौभाग्‍य की प्राप्ति हो। मुझे स्‍वस्‍थ शरीर से सुख, शांति और वैभवर्पूक रहते हुए अपने परिवार के साथ रहते हुए कल्कि जी की प्रसन्‍नता का काम करना है।

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