Baglamukhi Maa
बगलामुखी माँ
हे बगलामुखी माँ, आप दस महाविद्याओं में से एक हैं। आदिकाल में एक अति तीव्र भयंकर तूफान ने प्रकट होकर सृष्टि का विनाश प्रारम्भ किया। सभी देवी-देवता सौराष्ट्र प्रदेश में एकत्र होकर आदि महाशक्ति से मदद की प्रार्थना करने लगे। उस समय हरिद्र सरोवर से माँ बगुला आप प्रकट हुई। देवताओं की प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकर आपने उस तूफान को शांत कर सृष्टि की रक्षा की। हे महाशक्ति आप दाएं हाथ में मुदगल धारण करती हैं, जिससे आप दुष्टों का नाश, आसुरी षडयंत्रकारी शक्तियों का दमन करती हैं। आप बाएं हाथ से अपने भक्त के शत्रुओं की जीभ खींचकर उनकी बुद्धि, विवेक, वाणी और गति को स्तम्भित “स्थिर” करती हो। आप महाशक्ति स्तम्भन (स्थिरता) उच्चारण और वशीकरण की स्वाभिमानी हैं। भगवान् विष्णु के सुदर्शन चक्र की संहारक शक्ति में माँ बगुला आप ही विद्यमान हैं। शत्रु षडयंत्रकारी, छद्मवेशधारी, तांत्रिक शक्तियों के हर प्रहार से आप अपने भक्त की रक्षा करती हैं, विपरीत परिस्थितियों का सामना करके उन्हें अपने भक्त के अनुकूल बनाने की शक्ति प्रदान करती हैं, हर मुकदमें में विजय प्रदान करती हैं। हर प्रकट जीव/वस्तु प्रत्यक्ष और वस्तु अप्रकट जीव/वस्तु अप्रत्यक्ष होकर शून्य में किस रूप में रहती हैं, ब्रह्माण्ड के इस गूण रहस्य का ज्ञान हे महाशक्ति आप ही के पास है।
हे बगलामुखी माँ, मैं यह 20 रुपये (इसमें 15 रुपये का प्रसाद, 5 रुपये दक्षिणा) अथवा 5 रुपये, 2 बताशे आपकी दक्षिणा और प्रसाद के निमित्त संकल्प करके आपको अर्पण कर रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें। कलियुग के नेतृत्व में जो भी कुटिल, शैतानी षडयंत्रकारी, छद्मवेशधारी, आसुरी शक्तियाँ मुझ पर प्रहार करके मेरे मान, सम्मान, यश और प्रतिष्ठा, व्यापार, सुख-समृद्धि का नाश करना चाहती हैं सामाजिक रूप से मुझे निन्दा का पात्र बनाना चाहती हैं मेरे मन और मस्तिष्क पर प्रहार करके मुझे मानसिक रूप से विक्षिप्त और पंगु बनाना चाहती हैं (अनुभव का विवरण अपनी परेशानी बताकर), उनका मुख मस्तिष्क बांधें उन्हें स्तम्भित “स्थिर” करके उनमें कील ठोको उनका दमन करो, नाश करो, उनके हर दैहिक, दैविक, भौतिक शारीरिक, और मानिसक प्रहारों से मेरी रक्षा करें, मुझे कल्कि जी के प्राकट्य का अति विशिष्ट कार्य करना है।
हे बगलामुखी माँ अपनी परेशानियाँ बताकर – मुझे श्री कल्कि जी का कार्य करना है। मुझे (इन बताई गई परेशानियों) से निकालिए। मैं आपको प्रसाद, दक्षिणा, भेंट (चढ़ाना) चढ़ाऊंगा/चढ़ाऊंगी।
नोट: बंगलामुखी माँ को पीली बर्फी, नुकती, बूंदी, बेसन के लड्डू का प्रसाद चढ़ा सकते हैं।
ЁЯХЙя╕П Latest Events
тЬи Share Your Anubhav
Your spiritual experiences inspire others on this divine path.
Submit Anubhav