Surya Bhagwan
सूर्य भगवान्
दैवीय जगत की प्रमुख शक्तियों में से सूर्य भगवान् ही इस जगत के ऐसे प्रत्यक्ष देवता हैं जो प्रतिदिन अपनी अनंत किरणों के तेज से एक पिता की तरह पृथ्वी, देवता और असुरों सहित तीनों लोकों का पालन करते हैं। इनकी किरणों में प्रचण्ड अग्नि का वास है। जिससे वह स्वयं भी व्याकुल हो जाते हैं। इसीलिये सृष्टि के प्रारम्भ से ही भगवान् सूर्य को जल द्वारा अर्घ्य दिया जाता है, जो इन्हें अत्यंत प्रिय है। क्योंकि वह इन्हें शीतलता प्रदान करता है। जिस तरह एक पिता इच्छा न होने पर भी अपने लाडली पुत्री-पुत्रों की हर इच्छा को पूरा करता है- क्योंकि सम्पूर्ण लोकों में जितनी भी क्रियाएं होती हैं उन पर सबका पूर्ण फल देने में यह पूर्ण समर्थ हैं। उसी तरह अर्घ्य के साथ भगवान् श्री कल्कि का नाम जुड़ते ही सूर्य देव अत्यंत प्रसन्न होकर कल्कि भक्तों के असम्भव कार्य को संभव कर देते हैं इसीलिये हर कल्कि भक्त को प्रतिदिन सूर्य भगवान् के जो बारह नाम इस प्रकार हैं-*
आदित्य दिवाकर, भास्कर, प्रभाकर, सहस्त्रांशु त्रैलोक्यलोचन, हरिदश्वश्च, विभावसु, दिनकर, द्वादशात्मक, सूर्य। इनका उच्चारण करके नमस्कार करें एवं तांबे के लौटे में गुलाब/गेंदा, फूल, चावल और चीनी के साथ जल में डालकर, रोली से लौटे पर सतिया बनाकर भगवान् सूर्य को गायत्री मंत्र के साथ पंजे के बल बन पड़े तो खड़े होकर तीन बार अर्घ्य देना चाहिए। अपनी हर परेशानी आप सूर्य भगवान् से एक सच्चे पिता की तरह कहें और आप देंखेंगे कि कितनी जल्दी आपको परेशानी से निकलने का रास्ता मिलता है।
प्रार्थना: हे सूर्य भगवान्, आप असम्भव को सम्भव करने वाले हैं। आप मुझ पर अपनी ही नहीं और भी देवी-देवताओं की कृपा कराते हैं। (एक या दो परेशानी बताकर) मुझे इनसे निकालो, मुझे रास्ता दो। मुझे, मेरे परिवार को आयु और आरोग्यता प्रदान करें (जो परेशानी है वह कहें) मुझे कल्कि जी के प्रचार का काम करना है मुझे रास्ता दो।
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