Kalki Poojan Ahwan
ЁЯзШ Category: Puja
ЁЯУЕ 17/08/15
श्री कल्कि पूजन आह्वान
श्री गुरू चरण कमल रज सिर धर, करके गणपति के गुणगान।
सरस्वती, श्री, पार्वती, माँ सिंह वाहिनी का धर ध्यान।।
सुर तेंतीस करोड़ प्रजापति, लोकपाल शंकर हनुमान।
नारायण प्रिय धर्म सनातन, चार वेद सब शास्त्र पुराण।।
ऋषि मुनि योगी सन्त तपस्वी, सिद्ध साधु गुण ज्ञान निधान।
यति सति रण शूर और दानी वसुधा के रत्न महान।।
तीर्थ सकल गंगा गौ ब्राह्मण, भारत भूतल स्वर्ग समान।
इन्द्रप्रस्थ संग पतित पावनी, कालिन्दी का कर सम्मान।।
कवच अभेद्य प्रभंजन सुत प्रिय, गदा मुकुट माला पद त्राण।
कूचा पातीराम नई बस्ती में, सद्गुरू देवस्थान।।
पंचभूत चौंसठ योगिनियाँ, शिवगण भैरव समन सुजान।
वाहन भूषण शक्ति शस्त्र युत मम सर्वस्व कल्कि भगवान।।
राघव राजा राम तुम माधव सुन्दर श्याम।
पूर्ण परात्पर कल्कि प्रभु, प्रतिपल तुम्हें प्रणाम।।
प्रथम करो प्रभु, अर्ध्य ग्रहण, फिर पाद्य आचमन।
पंचामृत गंगा जल से हो, स्नान जनार्दन।।
धारण कर यज्ञोपवीत, नव वस्त्राभूषण।
पुष्प रत्न मणि माल, भाल मलयागिरि चन्दन।।
रवि सम दिव्य प्रकाशमय, सिंहासन स्वीकार हो।
भक्तों को पद्मा रमा, सहित साक्षात्कार हो।।
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